शल्य पर्व  अध्याय ४५

वैशम्पाय़न उवाच

शिशुमारमुखी श्वेता लोहिताक्षी विभीषणा |  २२   क
जटालिका कामचरी दीर्घजिह्वा वलोत्कटा ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति