शल्य पर्व  अध्याय ४५

वैशम्पाय़न उवाच

एकाक्षरा सुकुसुमा कृष्णकर्णी च भारत |  २४   क
क्षुरकर्णी चतुष्कर्णी कर्णप्रावरणा तथा ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति