menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ५५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
एते चान्ये च वहवो निहतास्त्वत्कृते नृपाः |  ३४   क
त्वामद्य निहनिष्यामि गदय़ा नात्र संशय़ः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति