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शल्य पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
माहात्म्येन च संय़ुक्ताः कामरूपधरास्तथा |  ३१   क
निर्मांसगात्र्यः श्वेताश्च तथा काञ्चनसंनिभाः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति