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विराट पर्व
अध्याय ३३
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वैशम्पाय़न उवाच
त्वं हि राष्ट्रस्य परमा गतिर्मत्स्यपतेः सुतः |  २०   क
गतिमन्तो भवन्त्वद्य सर्वे विषय़वासिनः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति