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शल्य पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
सर्वेषां भूतसङ्घानां हर्षान्नादः समुत्थितः |  ५५   क
अपूरय़त लोकांस्त्रीन्वरे दत्ते महात्मना ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति