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शल्य पर्व
अध्याय ४५
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वैशम्पाय़न उवाच
स शक्त्यस्त्रेण सङ्ग्रामे जघान भगवान्प्रभुः |  ६४   क
दैत्येन्द्रं तारकं नाम महावलपराक्रमम् |  ६४   ख
वृतं दैत्याय़ुतैर्वीरैर्वलिभिर्दशभिर्नृप ||  ६४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति