आदि पर्व  अध्याय ४६

मन्त्रिण ऊचुः

यावद्धनं प्रार्थय़से तस्माद्राज्ञस्ततोऽधिकम् |  २०   क
गृहाण मत्त एव त्वं संनिवर्तस्व चानघ ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति