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शान्ति पर्व
अध्याय ४६
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वैशम्पाय़न उवाच
रामस्य दय़ितं शिष्यं जामदग्न्यस्य पाण्डव |  १७   क
आधारं सर्वविद्यानां तमस्मि मनसा गतः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति