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शान्ति पर्व
अध्याय ४६
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वैशम्पाय़न उवाच
तच्छ्रुत्वा वासुदेवस्य तथ्यं वचनमुत्तमम् |  २४   क
साश्रुकण्ठः स धर्मज्ञो जनार्दनमुवाच ह ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति