अनुशासन पर्व  अध्याय ४६

भीष्म उवाच

पितृभिर्भ्रातृभिश्चैव श्वशुरैरथ देवरैः |  ३   क
पूज्या लालय़ितव्याश्च वहुकल्याणमीप्सुभिः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति