विराट पर्व  अध्याय १८

द्रौपद्यु उवाच

तं वेणीकृतकेशान्तं भीमधन्वानमर्जुनम् |  २०   क
कन्यापरिवृतं दृष्ट्वा भीम सीदति मे मनः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति