आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४६

व्रह्मो उवाच

गुरुणा समनुज्ञातो भुञ्जीतान्नमकुत्सय़न् |  ३   क
हविष्यभैक्ष्यभुक्चापि स्थानासनविहारवान् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति