आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४६

व्रह्मो उवाच

अगन्धरसमस्पर्शमरूपाशव्दमेव च |  ४६   क
अत्वगस्थ्यथ वामज्जममांसमपि चैव ह ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति