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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
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वैशम्पाय़न उवाच
साध्यानामथ देवानां वसूनां मरुतामपि |  १४   क
गणेषु पश्य राजेन्द्र वृष्ण्यन्धकमहारथान् |  १४   ख
सात्यकिप्रमुखान्वीरान्भोजांश्चैव महारथान् ||  १४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति