आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ४६

युधिष्ठिर उवाच

यं पुरा पर्यवीजन्त तालवृन्तैर्वरस्त्रिय़ः |  ४   क
तं गृध्राः पर्यवीजन्त दावाग्निपरिकालितम् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति