वन पर्व  अध्याय ४६

वैशम्पाय़न उवाच

यथा हि किरणा भानोस्तपन्तीह चराचरम् |  १६   क
तथा पार्थभुजोत्सृष्टाः शरास्तप्स्यन्ति मे सुतान् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति