वन पर्व  अध्याय ४६

सञ्जय़ उवाच

मन्युना हि समाविष्टाः पाण्डवास्तेऽमितौजसः |  २०   क
दृष्ट्वा कृष्णां सभां नीतां धर्मपत्नीं यशस्विनीम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति