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द्रोण पर्व
अध्याय ११२
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सञ्जय़ उवाच
एकत्रिंशन्महाराज पुत्रांस्तव महारथान् |  ३६   क
हतान्दुर्योधनो दृष्ट्वा क्षत्तुः सस्मार तद्वचः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति