उद्योग पर्व  अध्याय ४६

वैशम्पाय़न उवाच

उपय़ाय़ तु स क्षिप्रं रथात्प्रस्कन्द्य कुण्डली |  १४   क
प्रविवेश सभां पूर्णां महीपालैर्महात्मभिः ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति