भीष्म पर्व  अध्याय ४६

सञ्जय़ उवाच

एकोऽस्त्रवित्सखा तेऽय़ं सोऽप्यस्मान्समुपेक्षते |  २०   क
निर्दह्यमानान्भीष्मेण द्रोणेन च महात्मना ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति