आदि पर्व  अध्याय ४७

सूत उवाच

परिधाय़ कृष्णवासांसि धूमसंरक्तलोचनाः |  १८   क
जुहुवुर्मन्त्रवच्चैव समिद्धं जातवेदसम् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति