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शान्ति पर्व
अध्याय ४७
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वैशम्पाय़न उवाच
यः सहस्रसवे सत्रे जज्ञे विश्वसृजामृषिः |  २९   क
हिरण्यवर्णः शकुनिस्तस्मै हंसात्मने नमः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति