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शान्ति पर्व
अध्याय ४७
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वैशम्पाय़न उवाच
अपुण्यपुण्योपरमे यं पुनर्भवनिर्भय़ाः |  ३६   क
शान्ताः संन्यासिनो यान्ति तस्मै मोक्षात्मने नमः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति