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शान्ति पर्व
अध्याय ४७
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वैशम्पाय़न उवाच
अजस्य नाभावध्येकं यस्मिन्विश्वं प्रतिष्ठितम् |  ४०   क
पुष्करं पुष्कराक्षस्य तस्मै पद्मात्मने नमः ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति