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शान्ति पर्व
अध्याय ४७
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वैशम्पाय़न उवाच
अप्रमेय़शरीराय़ सर्वतोऽनन्तचक्षुषे |  ५०   क
अपारपरिमेय़ाय़ तस्मै चिन्त्यात्मने नमः ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति