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अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
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भीष्म उवाच
अव्राह्मणं तु मन्यन्ते शूद्रापुत्रमनैपुणात् |  १७   क
त्रिषु वर्णेषु जातो हि व्राह्मणाद्व्राह्मणो भवेत् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति