अनुशासन पर्व  अध्याय ४७

भीष्म उवाच

एवमेतत्समुद्दिष्टं धर्मेषु भरतर्षभ |  २६   क
एतद्धर्ममनुस्मृत्य न वृथा साधय़ेद्धनम् ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति