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अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
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भीष्म उवाच
दारा इत्युच्यते लोके नाम्नैकेन परन्तप |  ३०   क
प्रोक्तेन चैकनाम्नाय़ं विशेषः सुमहान्भवेत् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति