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अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
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भीष्म उवाच
शूद्रस्य स्यात्सवर्णैव भार्या नान्या कथञ्चन |  ५६   क
शूद्रस्य समभागः स्याद्यदि पुत्रशतं भवेत् ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति