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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४७
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व्रह्मो उवाच
अचेतनः सत्त्वसङ्घातय़ुक्तः; सत्त्वात्परं चेतय़तेऽन्तरात्मा |  १६   क
स क्षेत्रज्ञः सत्त्वसङ्घातवुद्धि; र्गुणातिगो मुच्यते मृत्युपाशात् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति