आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४७

व्रह्मो उवाच

यो न कामय़ते किञ्चिन्न किञ्चिदवमन्यते |  ८   क
इहलोकस्थ एवैष व्रह्मभूय़ाय़ कल्पते ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति