अनुशासन पर्व  अध्याय ५

भीष्म उवाच

विषय़े काशिराजस्य ग्रामान्निष्क्रम्य लुव्धकः |  २   क
सविषं काण्डमादाय़ मृगय़ामास वै मृगम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति