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विराट पर्व
अध्याय ४७
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भीष्म उवाच
ऋतवश्चापि युज्यन्ते तथा संवत्सरा अपि |  २   क
एवं कालविभागेन कालचक्रं प्रवर्तते ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति