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विराट पर्व
अध्याय ४७
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भीष्म उवाच
तेषामभ्यधिका मासाः पञ्च द्वादश च क्षपाः |  ४   क
त्रय़ोदशानां वर्षाणामिति मे वर्तते मतिः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति