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उद्योग पर्व
अध्याय ४७
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सञ्जय़ उवाच
उपासङ्गादुद्धरन्दक्षिणेन; परःशतान्नकुलश्चित्रय़ोधी |  २०   क
यदा रथाग्र्यो रथिनः प्रचेता; तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति