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उद्योग पर्व
अध्याय ४७
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सञ्जय़ उवाच
अन्वत्रस्तो वाहुवीर्यं विदान; उपह्वरे वासुदेवस्य धीरः |  ३   क
अवोचन्मां योत्स्यमानः किरीटी; मध्ये व्रूय़ा धार्तराष्ट्रं कुरूणाम् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति