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उद्योग पर्व
अध्याय ४७
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सञ्जय़ उवाच
ह्रीमान्मनीषी वलवान्मनस्वी; स लक्ष्मीवान्सोमकानां प्रवर्हः |  ३९   क
न जातु तं शत्रवोऽन्ये सहेर; न्येषां स स्यादग्रणीर्वृष्णिसिंहः ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति