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उद्योग पर्व
अध्याय ४७
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सञ्जय़ उवाच
उद्वर्तय़न्दस्युसङ्घान्समेता; न्प्रवर्तय़न्युगमन्यद्युगान्ते |  ५९   क
यदा धक्ष्याम्यग्निवत्कौरवेय़ां; स्तदा तप्ता धृतराष्ट्रः सपुत्रः ||  ५९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति