कर्ण पर्व  अध्याय २४

दुर्योधन उवाच

तप उग्रं समास्थाय़ निय़मे परमे स्थिताः |  ५   क
तपसा कर्शय़ामासुर्देहान्स्वाञ्शत्रुतापन ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति