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उद्योग पर्व
अध्याय ४७
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सञ्जय़ उवाच
यां तां वने दुःखशय़्यामुवास; प्रव्राजितः पाण्डवो धर्मचारी |  ९   क
आशिष्यते दुःखतरामनर्था; मन्त्यां शय़्यां धार्तराष्ट्रः परासुः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति