menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अनालव्धं जृम्भति गाण्डिवं धनु; रनालव्धा कम्पति मे धनुर्ज्या |  ९६   क
वाणाश्च मे तूणमुखाद्विसृज्य; मुहुर्मुहुर्गन्तुमुशन्ति चैव ||  ९६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति