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शान्ति पर्व
अध्याय ७३
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वाय़ुरु उवाच
शव्दे स्पर्शे रसे रूपे गन्धे च रमते मनः |  २४   क
तेषु भोगेषु सर्वेषु नभीतो लभते सुखम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति