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द्रोण पर्व
अध्याय ४७
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सञ्जय़ उवाच
उपदिष्टा मय़ा अस्य पितुः कवचधारणा |  २७   क
तामेष निखिलां वेत्ति ध्रुवं परपुरञ्जय़ः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति