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शल्य पर्व
अध्याय ४७
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वैशम्पाय़न उवाच
अथ तत्कर्म दृष्ट्वास्याः प्रीतस्त्रिभुवनेश्वरः |  २४   क
ततः सन्दर्शय़ामास कन्याय़ै रूपमात्मनः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति