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कर्ण पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
महेन्द्रेण यथा वृत्रो यथा रामेण रावणः |  ५२   क
यथा कृष्णेन निहतो मुरो रणनिपातितः |  ५२   ख
कार्तवीर्यश्च रामेण भार्गवेण हतो यथा ||  ५२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति