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शल्य पर्व
अध्याय ४७
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्यास्तु तेन वृत्तेन तपसा च विशां पते |  ५   क
भक्त्या च भगवान्प्रीतः परय़ा पाकशासनः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति