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शल्य पर्व
अध्याय ४७
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्यास्तु जातकर्मादि कृत्वा सर्वं तपोधनः |  ५९   क
नाम चास्याः स कृतवान्भारद्वाजो महामुनिः ||  ५९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति