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आदि पर्व
अध्याय ४८
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शौनक उवाच
सर्पसत्रे तदा राज्ञः पाण्डवेय़स्य धीमतः |  १   क
जनमेजय़स्य के त्वासन्नृत्विजः परमर्षय़ः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति