आदि पर्व  अध्याय ४८

सूत उवाच

कश्मलं चाविशद्घोरं वासुकिं पन्नगेश्वरम् |  २०   क
स घूर्णमानहृदय़ो भगिनीमिदमव्रवीत् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति